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पूर्व कुलपति

प्रो_एम._जगदीश_कुमार
27_जनवरी_2016_-_07_फ़रवरी_2022
 
प्रो._एम._जगदीश_कुमार_वर्तमान_में_विश्वविद्यालय_अनुदान_आयोग_के_अध्यक्ष_और_आईआईटी_दिल्ली_में_इलेक्ट्रिकल_इंजीनियरिंग_के_प्रोफेसर_हैं।_वह_अभी_भी_IIT_दिल्ली_में_पढ़ाते_हैं।_उन्होंने_फिलिप्स_सेमीकंडक्टर्स,_नीदरलैंड्स_द्वारा_आईआईटी_दिल्ली_में_स्थापित_एनएक्सपी_(फिलिप्स)_चेयर_प्रोफेसर_का_पद_संभाला।_उन्हें_IIT_दिल्ली_से_शिक्षण_में_उत्कृष्टता_के_लिए_(बड़ी_श्रेणी_की_श्रेणी_में)_2013_का_पुरस्कार_मिला।_वह_इंडियन_नेशनल_एकेडमी_ऑफ_इंजीनियरिंग,_द_नेशनल_एकेडमी_ऑफ_साइंसेज,_भारत_और_द_इंस्टीट्यूशन_ऑफ_इलेक्ट्रॉनिक्स_एंड_टेलीकम्युनिकेशन_इंजीनियर्स,_इंडिया_के_फेलो_हैं।_सेमीकंडक्टर_डिवाइस_डिजाइन_और_मॉडलिंग_के_क्षेत्र_में_विशिष्ट_योगदान_के_लिए_उन्हें_29वें_आईईटीई_राम_लाल_वाधवा_गोल्ड_मेडल_से_सम्मानित_किया_गया_है।_उन्हें_एक_प्रतिष्ठित_भारतीय_शिक्षाविद_और_शोधकर्ता_को_एक_संरक्षक_और_शोधकर्ता_के_रूप_में_महत्वपूर्ण_भूमिका_निभाने_के_लिए_मान्यता_देने_के_लिए_इंडिया_इलेक्ट्रॉनिक्स_एंड_सेमीकंडक्टर_एसोसिएशन_द्वारा_दिया_गया_पहला_आईएसए-वीएसआई_टेक्नोमेंटर_अवार्ड_भी_मिला।_वह_पेशेवर_उपलब्धियों_की_मान्यता_में_2008_आईबीएम_फैकल्टी_अवार्ड_के_प्राप्तकर्ता_हैं।_वह_राष्ट्रीय_विज्ञान_संग्रहालय_परिषद,_संस्कृति_मंत्रालय,_भारत_सरकार_के_शासी_निकाय_के_अध्यक्ष_हैं।_वह_अध्यक्ष,_सामान्य_परिषद,_राष्ट्रीय_मूल्यांकन_और_प्रत्यायन_परिषद,_(NAAC)_भी_हैं।_वे_विश्वविद्यालय_के_बारहवें_कुलपति_थे।

 

प्रो._एस._के._सोपोरी 8_जनवरी_2011_-_27_जनवरी_2016   प्रो._सुधीर_कुमार_सोपोरी_एक_प्रख्यात_वैज्ञानिक_और_शिक्षाविद्_थे।_उन्होंने_जवाहरलाल_नेहरू_विश्वविद्यालय_के_जीवन_विज्ञान_संस्थान_(एसएलएस)में_संकाय_सदस्य_के_रूप_में_वर्ष_1973_में_अपने_अकादमिक_कैरियर_की_शुरुआत_की_थी। प्रो._सोपोरी_वैज्ञानिक_शोध_और_शिक्षण_में_अपने_अग्रणी_योगदान_के_लिए_विभिंन_राष्ट्रीय_और_अंतरराष्ट्रीय_पुरस्कारों_से_सम्मानित_किए_गए_हैं।उनमें_सेनिम्न_लिखित_पुरस्कार_उल्लेखनीय_हैं:_सीएसआईआर_का_प्रतिष्ठित_भटनागर_पुरस्कार,_चक्रवर्ती_पुरस्कार,_बोटनीकल_सोसायटी_का_बीरबल_साहनी_पदक,_भारतीय_विज्ञान_कांग्रेस_का_बीरबल_साहनी_जन्मशती_पुरस्कार,_बेलारूस_एकेडमी_ऑफ_साइंसेज_कागोडनेव_अवार्ड_लेक्चर_और_भारत_सरकार_का_पद्मश्री। वह_भारतीय_राष्ट्रीय_विज्ञान_अकादमी_(नई_दिल्ली),_भारतीय_विज्ञान_अकादमी_(बेंगलूरु),_राष्ट्रीय_विज्ञान_अकादमी_(इलाहाबाद),_राष्ट्रीय_कृषि_विज्ञान_अकादमी_(नई_दिल्ली)_और_वर्ल्ड_एकेडमी_ऑफ_साइंसेज_(ट्राइस्टे,_इटली)_के_निर्वाचित_अध्येता_(फेलो)_हैं।_उन्हें_अमेरिकन_सोसायटी_फॉर_प्लांट_बायोलॉजी,_2010_का_कॉरेसपोंडिंग_मेम्बरशिप_अवार्ड_भी_मिला_है।इस_पुरस्कार_को_प्राप्त_करने_वाले_वह_पहले_भारतीय_हैं।_वह_विश्वविद्यालय_के_ग्यारहवें_कुलपति_थे।

 

प्रो._बी._बी._भट्टाचार्य 29_जून_2005_–_27_जनवरी_2011   प्रख्यात_अर्थशास्त्री_और_शिक्षाविद्_प्रो._बी_बी_भट्टाचार्य_आर्थिक_मॉडलिंग_और_पूर्वानुमान_के_अग्रणी_विशेषज्ञ_थे।_उन्होंने_कई_विशिष्ट_पदों_जैसे_इंस्टीट्यूट_ऑफ_इकोनॉमिक_ग्रोथ,_दिल्ली_के_बतौर_निदेशक_आदि_संभाले।_उन्होंने_भारत_सरकार_के_कई_महत्वपूर्ण_आयोगों_और_समितियों_और_शिक्षण_संस्थानों_में_बतौर_अध्यक्ष/सदस्य_कार्य_किया_है।_वह_पेरिस_में_नवाचार_राजनीति_के_लिए_फाउंडेशन_के_पर्यवेक्षी_बोर्ड_के_सदस्य_थे।_उन्हें_कई_पुरस्कार_और_सम्मान_मिले_जैसे_फ्रांस_सरकार_काऑर्डर_डे_पाम्ज_एकेडमिक्स,_बैंक_ऑफ_बड़ौदा_का_सन_लाइफटाइम_अचीवमेंट_अवार्ड,_कालीदास_सम्मान,_यूरोपीय_बिजनेस_कॉंसिल_का_सुकरात_पुरस्कारऔर_मदर_टेरेसा_लाइफटाइम_अचीवमेंट_अवार्ड_आदि।_वह_विश्वविद्यालय_के_दसवें_कुलपति_थे।

 

प्रो._जी._के._चड्ढा 1_मई_2002_–_6_जून_2005   प्रख्यात_शिक्षाविद_और_अर्थशास्त्रीप्रो._गोपाल_कृष्ण_चड्ढा_प्रधानमंत्री_की_आर्थिक_सलाहकार_परिषद_के_सदस्य_थे।_वह_भारतीय_सामाजिक_विज्ञान_अनुसंधान_परिषद,_नई_दिल्ली;भारतीय_योजना_आयोगऔर_अंतरराष्ट्रीय_श्रम_संगठन,_नई_दिल्ली_स्थित_क्षेत्रीय_कार्यालय_के_सलाहकार_पैनल_पर_भी_थे।_इसके_अलावावह_अर्थशास्त्र_में_सभी_शैक्षिक_एसोसिएशनों_के_आजीवन_सदस्य_रह_चुके_हैं।_वहसाउथ_एशियन_यूनिवर्सिटी_के_पहले_अध्यक्ष_रह_चुके_हैं।_वह_इस_विश्वविद्यालय_के_नौवें_कुलपति_थे।

 

प्रो._आशीष_दत्ता 29_जून_1996_–_30_अप्रैल_2002   प्रख्यात_आणविक_जीव_विज्ञानी_और_शिक्षाविद्_प्रो._आशीष_दत्ता_को_1999_में _"पद्म_श्री_"_पुरस्कार_और_2006_में_"पद्म_भूषण"_पुरस्कार_प्राप्त_हुआ_।_वह_शान्ति_स्वरुप_भटनागर_पुरस्कार_और_"प्रियदर्शिनी_पुरस्कार"_प्राप्त_कर_चुके_हैं।_प्रो._दत्ता_सभी_तीन_प्रमुख_भारतीय_विज्ञान_अकादमियों_तथा_"तीसरी_दुनिया_की_विज्ञान_अकादमियां"_के_निर्वाचित_अध्येता_(फेलो) _हैं।_वह_अनेक_अन्य_पुरस्कार_और_सम्मान_विजेता_रहे_हैं। _प्रो._दत्ता_ने_विभिंन_पदों_पर_सरकार_की_सेवा_की_है।_वह_राष्ट्रीय_पादप_जीनोम_अनुसंधान_संस्थान_(एनआइपीजीआर)_के_संस्थापक_निदेशक_थे।_वह_जेएनयू_के_आठवें_कुलपति_थे।

 

प्रो._योगिंदर_कुमार_अलग 14 दिसंबर_1992-28_जून_1996   प्रख्यात_अर्थशास्त्री,_शिक्षाविद्_और_सरकार_के_नीति_सलाहकार_प्रो._योगिंदर_कुमारअलगने_बतौर_राज्य_सभा_सदस्य_सेवा_की_है_तथा_वह_योजना_एवं_कार्यक्रम_कार्यान्वयन,_विज्ञान_और_प्रौद्योगिकी_तथा_विद्युत_राज्य_मंत्री_(स्वतंत्र_प्रभार)_नियुक्त_हुए।_वह_विभिन्न_संस्थाओं_के_प्रमुख_और_आयोगों_के_अध्यक्ष_रहे_तथा_उन्होंने_संयुक्त_राष्ट्र_के_कई_संगठनों_मेंबतौर_विशेषज्ञ_काम_किया।_वह_योजना_आयोग,_भारत_सरकार_के_सदस्य_भी_थे।_वह_गुजरात_केंद्रीय_विश्वविद्यालय_के_कुलाधिपति_हैं।_वह_जेएनयू_के_सातवें_कुलपति_थे।

प्रो._मोहम्मद_शाफी_अगवानी 7अक्तूबर_1987-6अक्तूबर_1992   पश्चिम_एशिया_विषय_के_शिक्षाविद्_और_विशेषज्ञ_प्रो._मोहम्मद_शाफी_अगवानी_का_इस_विश्वविद्यालय_के_साथ_काफी_लंबे_समय_तक_जुड़ाव_रहा।_उन्होंने_अंतरराष्ट्रीय_अध्ययन_संस्थान_(एसआईएस)_में_पश्चिम_एशियाई_अध्ययन_केन्द्र_को_स्थापित_करने_में_सक्रिय_भूमिका_निभाई।_उन्होंने_ऐसा_माहौल_बनाने_के_लिए_प्रयास_किया_जिसमें_शिक्षक_और_छात्र_अपना_सर्वश्रेष्ठ_योगदान_दे_सकें।_वह_कुलपति_रहने_के_बाद_राष्ट्रीय_अल्पसंख्यक_आयोग_के_सदस्य_थे।_वह_जेएनयू_के_छठे_कुलपति_थे_। 

प्रो._पी._एन._श्रीवास्तव 5_मार्च_1983-_30_अप्रैल_1987   प्रख्यात_वैज्ञानिक_(जीवन_विज्ञान)_तथा_राष्ट्रीय_शिक्षा_नीति_(1986)_के_प्रमुख_वास्तुकार_और_स्वायत्त_कॉलेजों_की_अवधारणा_के_मुख्य_समर्थकप्रो_पी.एन._श्रीवास्तव_विश्वविद्यालय_के_पांचवें_कुलपति_थे।_उनके_कार्यकाल_के_दौरान_विश्वविद्यालय_की_प्रवेश_नीतियों_में_बदलाव_देखने_को_मिले_तथा_केंद्रीकृत_प्रवेश-परीक्षा_की_शुरुआत_हुई।_बाद_में_वह_योजना_आयोग,_भारत_सरकार_के_सदस्य_बने।_उन्होंने_भारतीय_विज्ञान_कांग्रेस_संघ_के_बतौर_अध्यक्ष_भी_कार्य_किया।

येलवर्ती_नायडुम्मा 12_जून_1981-27_अक्तूबर_1982   प्रतिष्ठित_वैज्ञानिक_प्रो.येलवर्ती_नायडुम्मा_केंद्रीय_चर्म_अनुसंधान_संस्थान_(सीएलआरआई),_मद्रास_के_प्रमुख_रह_चुके_हैं_तथा_वह_वर्ष_1981_में_इस_विश्वविद्यालय_के_कुलपति_के_पदकी_जिम्मेदारी_लेने_से_पहले_सीएसआईआर,_नई_दिल्ली_के_महानिदेशक_थे।_उन्हें_वर्ष_1971_में_पद्मश्री_सहित_कई_राष्ट्रीय_और_अंतरराष्ट्रीय_पुरस्कारोंतथा_सम्मानों_से_नवाजा_गया।_वह_जेएनयू_के_चौथे_कुलपति_थे।

के._आर._नारायणन 3_जनवरी_1979-14_अक्तूबर_1980   प्रो._के.आर._नारायणन_भारत_गणराज्य_के_राष्ट्रपति_बने।_वह_एक_कैरियर_राजनयिक_थे_जो_थाइलैंड,_तुर्की_और_चीन_जैसे_विभिन्न_देशों_में_राजदूत_के_रूप_में_देश_की_सेवा_की_है।उन्होंने_एक_शिक्षाविद_के_रूप_में_अपने_कैरियर_की_शुरुआत_की_और_बाद_में_एक_पत्रकार_(संक्षेप)_बने।_जेएनयू_छोडने_के_बाद_उन्हें_अमेरिका_का_राजदूत_नियुक्त_किया_गया।_वे_तीन_बार_लोकसभा_के_लिए_चुने_गए_और_उन्होंने_1985-89_तक_केंद्रीय_मंत्री_के_रूप_में_कार्य_किया।_वह_1992_में_भारत_के_उप_राष्ट्रपति_चुने_गए_तथा_1997_में_गणतंत्र_के_सर्वोच्च_पद_तक_पंहुचे।_वह_जेएनयू_के_तीसरे_कुलपति_थे।

प्रो._बसंती_दुलाल_नागचौधरी 1_जुलाई_1974_–_1_जनवरी_1979   प्रख्यात_शिक्षाविद_और_भौतिकशास्त्री_(नाभिकीय_भौतिकी),_प्रो._बसंती_दुलाल_नागचौधरीने_योजना_आयोग_के_सदस्य_और_रक्षा_मंत्रालय,रक्षा_अनुसंधान_तथा_विकास_महानिदेशक,_भारत_सरकार_के_वैज्ञानिक_सलाहकार_के_रूप_में_भी_इस_देश_की_सेवा_की।_प्रो.नागचौधरी_1964_में_भारतीय_राष्ट्रीय_विज्ञान_अकादमी_के_फैलो_चुने_गएऔर_उन्हें_1975_में_पद्म_विभूषण_से_सम्मानित_किया_गया।_वह_जेएनयू_के_दूसरे_कुलपति_थे।

जी._पार्थासारथी 28_अप्रैल_1969_–_27_अप्रैल_1974   पत्रकार,_प्रसिद्ध_क्रिकेटरऔर_ख्यातिप्राप्त_राजनयिक_जिन्होंने_तीन_दशकों_से_अधिक_समय_तक_महत्वपूर्ण_सलाहकार_पदों_पर_कार्य_किया_है।नेहरू_से_लेकर_राजीव_गाँधी_तक_समय_में_गोपालस्वामी_पार्थासारथी_वर्ष_1969_में_इस_विश्वविद्यालय_के_प्रथम_कुलपति_बने_और_उन्होंने_अंतर्विषयी_अध्ययन_और_शोध_के_इस_प्रमुख_विश्वविद्यालय_के_उभरने_में_मदद_करके_एक_शिक्षाविद्के_रूप_में_अमिट_छाप_छोड़ी।_उन्होंने_भारतीय_जनसंचार_संस्थान_(आईआईएमसी)_की_स्थापना_की_और_आईसीएसएसआर_के_अध्यक्ष_के_रूप_में_भी_कार्य_किया।